
।। वंदेभारतलाइवटीव न्युज, मंगलवार 18 अगस्त 2026 ।।
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।। 28 अगस्त 2026 रक्षाबंधन पर विशेष लेख ।।

नागपुर—:: भाई बहनों के अनमोल अटूट प्रेम का प्रतीक होता है रक्षाबंधन का त्योहार। रक्षाबंधन का यह पवित्र त्योहार हर वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाई जाती है। इस बार 2026 में रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त 2026 दिन शुक्रवार को मनाया जायेगा। जानकारी अनुसार इस वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि पर एक दुर्लभ खगोलिय संयोग भी बन रहा है, इस दिन वर्ष का अंतिम चंद्रग्रहण भी लगने वाला है। रक्षाबंधन का त्योहार भाई बहन के पवित्र प्रेम, विश्वास, स्नेह का प्रतीक होता है।.रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाईयों की कलाई पर रक्षासूत्र जिसे राखी भी कहतें हैं,बांधतीं हैं और भाई के लिए सुख समृद्धि, लंबी आयु के लिए प्रार्थना करतीं हैं , और भाई अपने बहन की रक्षा , हर परिस्थिति में बहन का साथ देने का संकल्प लेता है, और इस शुभ अवसर भाई अपनी बहन को उपहार भी देता है बहन अपने को मिठाई खिलातीं हैं। पंचांग के अनुसार इस बार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 27 अगस्त गुरूवार को सुबह 09:07 बजे होगा और पूर्णिमा का समापन 28 अगस्त शुक्रवार 2026 को सुबह 09:49 बजे होगा।.उदयातिथि के अनुसार रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त शुक्रवार को मनाया जायेगा। पंचांग के अनुसार 28 अगस्त शुक्रवार 2026 को राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 05:57बजे से लेकर सुबह 09:48 बजे तक रहेगा, दोपहर मे 12:14से 01:05बजे तक और गोधूली बेला मे शाम 06:57 से शाम 07:19 बजे तक शुभ समय है। इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा रहित होगी। भद्रा में राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता है। हिंदू धर्म में हाथ की कलाई में रक्षासूत्र बांधना बहुत ही शुभ पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यतानुसार श्रावण मास पूर्णिमा तिथि पर शास्त्रीय विधि विधान के अनुसार कलाई में रक्षासूत्र बांधने से नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है और जीवन में सुख शांति का संचार होता है। ऐसा कहा जाता है कि द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण की उंगली से खून निकलने से रोकने के लिए अपनी साड़ी काटकर श्रीकृष्ण की उंगली पर बांधा था, जिसके बाद श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को उनकी रक्षा करने का वचन दिया और निभाया भी था।.और यहीं से रक्षाबंधन को प्रेम और विश्वास का प्रतीक का पर्व माना जाने लगा। ईस बार रक्षाबंधन के दिन वर्ष का दूसरा और अंतिम चंद्रग्रहण भी लगने वाला है। चूंकि यह चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इससे चंद्रग्रहण का सूतककाल नियम मान्य नहीं होंगे, रक्षाबंधन त्योहार मनाने में चंद्रग्रहण की कोई भी अड़चन नहीं रहेंगी। 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन राहुकाल में राखी बांधने से बचना चाहिए, इस दिन राहुकाल सुबह 10:46 से शुरू होगा और दोपहर में 12:22 बजे राहुकाल खत्म होगा। रक्षाबंधन का यह त्योहार केवल भाई बहन के रिश्ते तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रेम, कर्तव्य, विश्वास, परिवार, और भारतीय परंपरा, संस्कृति का भी प्रतीक माना जाता है।इस त्योहार को भारतीयों के द्वारा बहुत ही श्रद्धा उत्साह के साथ मनाया जाता है। सनातन धर्म के सबसे लोकप्रिय शुभ पर्वों में से एक रक्षाबंधन को माना जाता है। रक्षाबंधन दो शब्दों रक्षा और बंधन से मिलकर बना है, इसका मतलब है कि रक्षा का पवित्र बंधन, यह बंधन केवल एक धागा ही नहीं, बल्कि भाई बहन के प्रेम, विश्वास, सम्मान, और जीवनभर साथ निभानें का संकल्प का प्रतीक है। सनातन परंपरा में रक्षासूत्र को बहुत ही शुभ माना गया है, प्राचीन काल से यज्ञ अनुष्ठान, धार्मिक कार्यों, संस्कार आदि शुभ कार्यों में रक्षासूत्र बांधने का परंपरा रही है, रक्षाबंधन के दिन भी बांधे जानै वाली राखी भी इसी भारतीय परंपरा का एक महत्वपूर्ण स्वरूप है। रक्षाबंधन का त्योहार हमें शिक्षा देता है कि प्रेम विश्वास, जिम्मेदारी ही किसी भी रिश्ते की सबसे बड़ी शक्ति भी होती है। रक्षाबंधन भाई बहन के रिश्ते को मज़बूत बनाने के साथ परिवार के सभी सदस्यों को भी एकसाथ जोङने का अवसर प्रदान करती है। भारतीय संस्कृति में केवल एक त्योहार ही नहीं, बल्कि पारिवारिक मूल्यों का उत्सव माना जाता है।







